✍🏻क़लम की ताकत✍🏻
क़लम है वो हथियार,
जो बिना खून बहाए जंग जीतता,
इंक़लाब की आग जलाए,
सपनों की दुनिया को रचता।
क़लम की स्याही में बसी है ताकत,
विचारों को शब्दों में बदलने की हिम्मत।
कभी प्रेम की बातें, कभी विरोध की बात,
क़लम से ही उभरे इंसान की हर सौगात।
जहां तलवारें गूंगी हो जाएं,
क़लम की आवाज़ वहां गूंज जाए।
कागज़ पर खींच दे सपनों की लकीरें,
दुनिया को दिखा दे नई तस्वीरें।
कभी शांति का संदेश, कभी संघर्ष की गाथा,
क़लम से लिखी जाती है हर युग की महाकथा।
रचती है इतिहास, बदलती है कायनात,
क़लम से ही बनती है सभ्यताओं की बुनियाद।
इसकी ताकत को ना कभी कम समझना,
क़लम ही है जो इंकलाब लाती है हर जमाना।
ज़ुबां की खामोशी को आवाज़ देती है,
क़लम ही है जो हकीकत बयां करती है।
कविता का सार:
यह कविता कलम की असीम शक्ति का बखान करती है। कविता में कलम को एक शक्तिशाली औजार के रूप में चित्रित किया गया है जो विचारों को शब्दों में बदलने, इतिहास रचने और समाज में परिवर्तन लाने में सक्षम है। कविता में कलम को तलवार से अधिक शक्तिशाली बताया गया है क्योंकि तलवार केवल भौतिक क्षति पहुंचा सकती है जबकि कलम विचारों को जन्म देती है और लोगों को प्रेरित करती है।
निष्कर्ष:
“क़लम की ताकत” एक उत्कृष्ट कविता है जो कलम की शक्ति को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कलम एक शक्तिशाली औजार है जिसका उपयोग अच्छे और बुरे दोनों कार्यों के लिए किया जा सकता है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी कलम का उपयोग किस काम के लिए करते हैं।